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मैंने हाँ कर दी। तो उसने मेरे गालों को चूम लिया। मुझे बहुत अच्छा लगा और मैं उसके होंठों को चूमने लगी और वो भी मेरे होंठों को जोर से चूमने लगा। मुझे पता भी नहीं चला कि कब मेरे कपड़े उतार लिए। वो मेरे स्तनों को ब्रा के ऊपर से दबाने लगा। फिर उसने ब्रा को भी अलग कर दिया और मेरे चुचूकों को चूमने लगा। मेरे बदन में चींटियाँ रेंगने लगी। बाद में उसने अपने कपड़े भी उतार दिए। मैंने उसका लंड मुँह में ले लिया और चूमने लगी।

Shariram chudagane andulo mavaiah modda chudagane naa mati poindi.nenu pavita vesinapputi nunchi nenu naganam ga magadini chudadam ade modatisri aninanduna naa pooku vedekki rasalu karcha sagindi naa channu lu nikka bodu chuko sagai adi gamanichina mavaiah naa daggariki vachi nanu vatey sukoni nanu bittalini chesi nannu swarga sukhalanu chupinchadu ala ayana oka varam rojula patu nannu vainchi delhi velli

मैं अब मामी की बुर में जोर जोर से उंगली करने लगा लेकिन मेरी उंगली आसानी से अंदर नहीं जा रही थी, बडी ही कसी हुई बुर थी मामी की। उफ़्फ़ !

मांजी सा ने मुझे रोज़ तीनों वक़्त का खाना भिजवाने को कह रखा था। मैं पहले नौकर से कहती थी लेकिन फिर खुद लेकर जाने लगी।

इस यन्त्र को पुष्य नक्षत्र में शनिवार के दिन पाठशानिकी की जड़ से लपेटकर ताबीज में रढाले और कंठ अथवा भुजा पर धारण करने से स्त्री का वशीकरण हो जायेगा पति वशीकरण यन्त्र

और मैंने अपनी जीभ उनके मुँह में डाल दी और हम दोनों एक दूसरे की जीभ को चूसने चाटने लगे। थोड़ी देर बाद मामी अपना मुँह मेरे लंड के पास लाईं और कहा कि तुमने मेरी बुर चूसी है, अब मैं भी तुम्हारा लंड चूसूंगी !

मैंने फिर से दीदी के मुँह में डाल दिया और बोला- चूस !

तभी सुधा गुस्से में आगे बड़ी और अपनी सहेली को जोर से पकड़ लिया और उसे किस करने लगी। मैं ये देख कर चौक गया और सोचा चलो एक नए माल की चूत ! आज तो चुदाई का मज़ा ही आ जाएगा।

Veetini guddlappaginchi chustuntaru veelaitey yedu vaka vankato veetini taka dani ki try out chestuntaru andi nenu niku yela anipistundi vallu ala chustuntey allanti panulu chestuntey ani adiganu.

मैंने कभी भी किसी लड़की की आज तक चूत नहीं देखी थी और मैं चूत देखने को बहुत लालयित था। मैं सोचता था कि कभी मुझे चूत के दर्शन करने को मिलेंगे क्या ! और मैं मुठ मार लिया करता था।

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उस दिन में केवल दोनों की चूत २ बार मारी और खूब मज़े किए. फिर मैंने दोनों की गाण्ड मारने की सोची. लेकिन वो दोनों इसके लिए तैयार नहीं हुई और बाद में करने के लिए कहने लगी.

तब मैंने दूसरी जांघ भी चूमनी चाटनी शुरू की और धीरे से अपना एक हाथ उनकी पैंटी पर फिराने लगा। मैंने देखा कि मामी की पैंटी पूरी गीली हो चुकी थी। पैंटी पर हाथ फिराते फिराते मैं उनकी बुर पर भी हाथ फिराने लगा जो कि एकदम गीली थी।

फिर एक दिन पति देव तो फ्लाईट पकड़ सिडनी पहुँच गए। वो चले गए और वहाँ जाकर मेरे पेपर्स भी तैयार करवाने लगे। उधर अब ससुर के इलावा मेरे जेठ की नियत मुझ पर खराब थी। हालाँकि वो दूसरे घर में रहता था लेकिन पति के जाने के बाद वो आने के बहाने ढूंढता। ससुर जी शायद डरते थे कि कहीं मैं विरोध ना कर दूँ !

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